मुक्त होने की चाह…
तमाम बंधन के जकड़ को तोड़, मुक्त होना चाहती हूं….. नहीं चाहती – कोई समाज,...
तमाम बंधन के जकड़ को तोड़, मुक्त होना चाहती हूं….. नहीं चाहती – कोई समाज,...
यह कविता मैंने अपने छोटे चाचा के लिए लिखी थी। मैं 12th में थी इस...
मूलांक छह और उनका चरित्र आपके जीवन में आकस्मिक घटनाएं ज्यादा घटती हैं। आपके जीवन...