ख्वाबों सी उसकी हसीन दुनिया, वाकई उसके ख्वाबों और ख्यालों से भी ज्यादा९ हसीन थी, कहते हैं ना, मोहब्बत से डर का वास्ता हिचकी की तरह होता है, वह कब आ जाए और खाने का स्वाद बिगाड़ दे, उसे भी अपनी रूमानी दुनिया से डर लगता।
वह अपनी इस मोहब्बत की दुनिया को काला टीका लगाना चाहती थी। डरती थी कि ऐसा ना हो की पलक झपकते ही उसकी दुनिया के दृश्य बदल जाए।
वह दिन भी आ गया जब उसके हमसफर तन्मय का जन्म दिवस था। वह (रोजी) बहुत खुश थी। आज रोजी तन्मय को सरप्राइज करना चाहती थी। उसने होटल के मैनेजर से मिलकर एक “रोमांटिक डेट विद बर्थडे पार्टी” ऑर्गेनाइज करवाई। सुबह वह खुद ही सरप्राइज हो गई जब तन्मय नहा धोकर तैयार हुआ तो उसमें एक अजीब सी कशिश थी।
वह उसे देखती रह गई, वह आज टेराकोटा रंग के कुर्ते में बिल्कुल ही अलग- लग रहा था, लंबा- चौड़ा शरीर, काले जामुन सा मीठे मीठे खुशबू बिखेरता उसका श्यामला रंग, दो बड़ी-बड़ी चमकती आंखें, तीखे नैन, होठों पर खिली मुस्कान और बात-बात पर ऐसा हंसता की मानो किसी हंसी के “स्केल” में नापतोल कर हंसना सीखा हो, रोजी उसे एकटक देखी ही जा रही थी वह रफ्ता – रफ्ता सा चलता हुआ रोजी के पास आया और उसके चेहरे के सामने चुटकी बजाते हुए बोला।
चलो देर हो रही है वह झेंपते हुए इतना ही बोल पाई, कहां? वह मुस्कुराता हुआ बोला- मंदिर।
मंदिर में तन्मय का एक अलग ही व्यक्तित्व था। भक्ति और श्रद्धा से सराबोर तन्मय बहुत ही सधे हाथों से भगवान को पूजा की सामग्री अर्पण कर रहा था और ऐसे मंत्र उच्चारण कर रहा था की एक पल को वह घबरा गई कि उसे तो पूजा के इतने नियम पता ही नहीं।
इतना बड़ा आर्किटेक्ट आखिर इन छोटी-छोटी बातों में भी इतना संपूर्ण होगा, उसने कभी सोचा भी नहीं था। वह तन्मय के साथ जितना वक्त गुजार रही थी, उसे जितना समझ रही थी, उसके दिल में उसके लिए उतनी ही इज्जत बढ़ती जा रही थी।. शाम को होटल में तन्मय ने उसकी सरप्राइज पार्टी को खूब इंजॉयइ किया। हां उसने लाउड सॉन्ग और गाने के बोल को बदलवाकर इंस्ट्रुमेंटल सॉन्ग बजाने को कहा। जब वह रोजी की बाहों में डांस कर रहा था तो उसके कान के पास धीरे से फुसफुसाता हुआ कुछ रोमांटिक गाने के बोल दोहराता जाता, तो कभी लव यू कहता, तो कभी थैंक यू कहता, तो कभी उसके बालों की तारीफ करता, कभी होठों की, कभी आंखों की।
तन्मय रोजी की हर छोटी-छोटी हरकतें और उसकी खूबसूरती की तारीफ में कसीदे गढ़ रहा था जो रोजी को रोमांचित कर रहा था । आज वह जान पाई थी कि वाकई मोहब्बत जिंदगी के लिए कितना जरूरी है, मुहब्बत के आने से जीवन में बसंत के सारे रंग-बिरंगे फूल एक साथ खिल जाते हैं वक्त बहुत तेजी से गुजर रहा था।
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प्रीति कुमारी
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सादर,
daink navjyoti
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प्रीति कुमारी