April 3, 2025

“खूबसूरत जिंदगी”[भाग -1]

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शादी की रस्में अभी खत्म भी नहीं हुई थी कि मोहब्बत की रस्में शुरू हो गई। जी हां! फरवरी का महीना और तारीख थी चार । यह बताना औचित्य नहीं होगा कि सात से वेलेंटाइन वीक की शुरुआत हो जाती है।

शर्माोहया से झुकी पलकों में इसलिए भी भारीपन था क्योंकि उसके ख्वाबों का हिमालय रचा बचा था उसमें।

साथ ही बसंत की बयार और मदहोश कर देने वाली फूलों की खुशबू चारों ओर इस कदर फैली हुई थी की ना चाहते हुए भी उसका रोम-रोम पुलकित हो जाता। प्रकृति भी मानो उस नई नवेली दुल्हन के स्वागत में बिछने को तैयार खड़ा था। ऐसा महासंयोग एक साथ- खुशकिस्मती थी उसकी या उसके पूर्व जन्म के पुण्य का फल।

अभी वेलेंटाइन वीक खत्म हुआ ही था कि उसके हनीमून की टिकट के साथ जब सास ने बताया की उसके जीवनसाथी का जन्मदिन 19 फरवरी को है, वह उसका बर्थडे हनीमून पर सेलिब्रेट कर दे, तो वह डर गई कि उसकी खुशियों को उसकी ही नजर ना लग जाए।

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ख्वाबों सी उसकी हसीन दुनिया, वाकई उसके ख्वाबों और ख्यालों से भी ज्यादा९ हसीन थी, कहते हैं ना, मोहब्बत से डर का वास्ता हिचकी की तरह होता है, वह कब आ जाए और खाने का स्वाद बिगाड़ दे, उसे भी अपनी रूमानी दुनिया से डर लगता।

वह अपनी इस मोहब्बत की दुनिया को काला टीका लगाना चाहती थी। डरती थी कि ऐसा ना हो की पलक झपकते ही उसकी दुनिया के दृश्य बदल जाए।

वह दिन भी आ गया जब उसके हमसफर तन्मय का जन्म दिवस था। वह (रोजी) बहुत खुश थी। आज रोजी तन्मय को सरप्राइज करना चाहती थी। उसने होटल के मैनेजर से मिलकर एक “रोमांटिक डेट विद बर्थडे पार्टी” ऑर्गेनाइज करवाई। सुबह वह खुद ही सरप्राइज हो गई जब तन्मय नहा धोकर तैयार हुआ तो उसमें एक अजीब सी कशिश थी।

वह उसे देखती रह गई, वह आज टेराकोटा रंग के कुर्ते में बिल्कुल ही अलग- लग रहा था, लंबा- चौड़ा शरीर, काले जामुन सा मीठे मीठे खुशबू बिखेरता उसका श्यामला रंग, दो बड़ी-बड़ी चमकती आंखें, तीखे नैन, होठों पर खिली मुस्कान और बात-बात पर ऐसा हंसता की मानो किसी हंसी के “स्केल” में नापतोल कर हंसना सीखा हो, रोजी उसे एकटक देखी ही जा रही थी वह रफ्ता – रफ्ता सा चलता हुआ रोजी के पास आया और उसके चेहरे के सामने चुटकी बजाते हुए बोला।

चलो देर हो रही है वह झेंपते हुए इतना ही बोल पाई, कहां? वह मुस्कुराता हुआ बोला- मंदिर।

मंदिर में तन्मय का एक अलग ही व्यक्तित्व था। भक्ति और श्रद्धा से सराबोर तन्मय बहुत ही सधे हाथों से भगवान को पूजा की सामग्री अर्पण कर रहा था और ऐसे मंत्र उच्चारण कर रहा था की एक पल को वह घबरा गई कि उसे तो पूजा के इतने नियम पता ही नहीं।

इतना बड़ा आर्किटेक्ट आखिर इन छोटी-छोटी बातों में भी इतना संपूर्ण होगा, उसने कभी सोचा भी नहीं था। वह तन्मय के साथ जितना वक्त गुजार रही थी, उसे जितना समझ रही थी, उसके दिल में उसके लिए उतनी ही इज्जत बढ़ती जा रही थी।. शाम को होटल में तन्मय ने उसकी सरप्राइज पार्टी को खूब इंजॉयइ किया। हां उसने लाउड सॉन्ग और गाने के बोल को बदलवाकर इंस्ट्रुमेंटल सॉन्ग बजाने को कहा। जब वह रोजी की बाहों में डांस कर रहा था तो उसके कान के पास धीरे से फुसफुसाता हुआ कुछ रोमांटिक गाने के बोल दोहराता जाता, तो कभी लव यू कहता, तो कभी थैंक यू कहता, तो कभी उसके बालों की तारीफ करता, कभी होठों की, कभी आंखों की।

तन्मय रोजी की हर छोटी-छोटी हरकतें और उसकी खूबसूरती की तारीफ में कसीदे गढ़ रहा था जो रोजी को रोमांचित कर रहा था । आज वह जान पाई थी कि वाकई मोहब्बत जिंदगी के लिए कितना जरूरी है, मुहब्बत के आने से जीवन में बसंत के सारे रंग-बिरंगे फूल एक साथ खिल जाते हैं वक्त बहुत तेजी से गुजर रहा था।

4 thoughts on ““खूबसूरत जिंदगी”[भाग -1]

  1. “एक निर्माता के रूप में, मुझे खुशी है कि आपकी पत्रिका दैनिक नवज्योति में प्रकाशन का अवसर मिला है। यह प्रतिष्ठित प्रकाशन व्यापक पाठकों तक पहुंचने और हमारे कार्यों की महत्वपूर्ण जानकारी साझा करने का बेहतरीन मंच प्रदान करता है। चाहे वह नई फिल्म का प्रमोशन हो, आगामी प्रोजेक्ट की घोषणा हो या कोई खास आयोजन, इस अवसर के माध्यम से हम सही दर्शकों तक अपनी बात पहुँचा सकते हैं। दैनिक नवज्योति के सहयोग के लिए मैं आभार व्यक्त करता हूँ और भविष्य में और भी सफल सहयोग की उम्मीद करता हूँ।”

    अगर आपको इसमें और कोई संशोधन चाहिए तो बताइए! 😊

    1. कृपया आप अपने सम्मानित दैनिक में मेरी कहानी मेरी बाई लाइन के साथ छाप सकते हैं बस छप जाए तो इसका पीडीएफ या प्रति कृपया मुझ तक पहुंचाने की कृपा करें।
      आभार
      प्रीति कुमारी

      1. बधाई हो, प्रीति! 🎉 आपकी रचना पत्रिका में प्रकाशित हो गई, यह सच में गर्व की बात है। आपकी लेखनी लोगों तक पहुँच रही है और अपने विचारों को साझा करने का यह एक शानदार तरीका है।आपकी रचनाएँ गहरी संवेदनाओं और समाज की वास्तविकताओं को दर्शाती हैं। यदि आप अपनी कहानी किसी समाचार पत्र या पत्रिका में प्रकाशित करवाना चाहती हैं, तो कृपया संबंधित संपादक या प्रकाशन हाउस से संपर्क करें।

        यदि आप चाहें, तो मैं आपकी कहानी को और प्रभावशाली बनाने के लिए सुझाव दे सकती हूँ या आपको सही प्लेटफ़ॉर्म खोजने में मदद कर सकती हूँ।

        आपकी लेखनी को बहुत शुभकामनाएँ!

        सादर,
        daink navjyoti

        1. प्रकाशित प्रति की कृपया URL या PDF प्रदान करने की कृपा करें
          सादर
          प्रीति कुमारी

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