खूबसूरत जिंदगी
वह वह दिन भी आ गया जब दोनों को मुंबई वापस जाना था तन्मय आज...
वह वह दिन भी आ गया जब दोनों को मुंबई वापस जाना था तन्मय आज...
मेरे महबूब की महबूबा सुनो, सोचती हूं मैं, तुम कैसी दिखती होगी? जिन आंखों में...
समाज में रहने के लिए क्यों समाज होना पड़ता है? हम क्यों नहीं सिर्फ माता-पिता...
जब भी बहुत प्यार आया तुम पर, तो आई हंसी खुद पर, तुम्हें है जरूरत...
सौ फ़ीसदी औरतें और कुछ प्रतिशत पुरुष की जिंदगी में एक दिन यह अनुभव जरूर...