प्यार और ममता

जब भी बहुत प्यार आया तुम पर,
तो आई हंसी खुद पर,
तुम्हें है जरूरत मेरे प्यार की नहीं…
बेवजह में अपनी ममता थोप रही,
जब भी तुम उदास लगा, हताश लगा, और लगा निराश
मेरे अंदर का बढ़ता गया पल – पल प्यास,
क्यों है तू दुखी, कहाँ ढूंढूू मैं तेरी खुशी…
क्या चाहिए तुझे, क्या खो गया
तेरा..
बस कह दे तू तो कर दूं,
कुर्बान सारा जहां मेरा…
Priti kumari