“जान” ने जान ली…?

रिश्ते- नाते, परंपरा, मर्यादा, सामाजिक दायरे….
के सारे गिरह खोलकर, तोड़कर… मैंने तुमसे गांठ लगाया।
बदले में बतलाओ क्या पाया?
अपना आधार, बुनियाद, अपनी जड़े, छोड़…..
दृढ़ता से था तेरे संग लहराया।
तुम्हें अपना मिनरल, ऊर्जा, जल सब बनाया…
बदले में बतलाओ क्या पाया?
Priti kumari