“तुम्हारे जैसी मैं भी”
“तुम्हारे जैसी मैं भी”
कितना वक़्त लगा मुझे,
तुम्हारे जैसा होने में…
अब तो मुस्कुरा रहे होंगे
देखो!
मै भी तुम्हारी तरह हो गई हूँ..
पहले भावावेश में बहती थी…
अब “खामोश”! रहना जानती हूँ…
पहले शब्दों को हथियार बनाती थी..
अब शब्दों को ना चुनती हूँ, ना बुनती हूँ…
हम, तुम कितने अलग थे..
तुम पत्थर मैं पानी,
तुम धैर्य, मैं कहानी,
तभी तो एक दूसरे के पूरक थे।
बिना एक दूसरे के अधूरे थे।
अब तो अच्छा लगता होगा ना, तुम्हें!
मै भी तुम्हारी तरह हो गयी हूँ,
हर बात में तुम ही तुम…