नारी तू सबला है
जल की अविरल धारा हैं हम
प्यार से सारा जहां सीचेंगे…
चट्टानों से गिरा कर भले बिखरा दो हमको ।
मत भूलो तुझ पत्थर को रेत बना देंगे,
हो सके जितना बाधाओं से घेरो हमको
फिर भी हम नहीं रुकेंगे,
दे दो सूखे आंसुओं का दाग आंचल में हमको,,
ममता की शीतलता से तुझे ढकेंगे।।
भले प्रताड़ित कर छलनी कर दो हमको ,
मुझ में पत्थर सी खामोशी तुझे दिखेंगे,
लाख बड़बड़ाओ गाली दो हमको,
मेरी चुप्पी शब्दों से ज्यादा डसेंगे ।।
सदा गिराओ कुचलो हमको
फिर भी हम आकाश चढ़ेंगे।।